जय विराग

ॐ संकट मोचन तारण हारे, गुरु विमर्श की जय जय जय ॐ

जय विमर्श

जिनागम पंथ जयवंत हो

“जीवन है पानी की बूँद” महाकाव्य के मूल शब्दशिल्पी, ‘विमर्श लिपि’ के सृजेता, “अहार जी के छोटे बाबा” आदर्श महाकवि, राष्ट्रयोगी, संघ शिरोमणि

भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के मंगल सान्निध्य में

तिजारा में प्रथम बार पर्यूषण पर्व की पावन बेला पर

उपासक संस्कार शिविर

दिनांक : 16 सितम्बर से 24 सितम्बर 2026

स्थान : श्री चन्द्र तीर्थ मण्डप, अतिशय देहरा तिजारा, जिला-खैरथल (राज.)

फार्म जमा करने की अंतिम तिथि — 20 अगस्त 2026

शिविर प्रारम्भ में शेष

--दिन
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--घंटे
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--मिनट
:
--सेकण्ड

शिविरार्थियों के शिविर संबंधी आवश्यक नियम

  1. 1

    दस दिनों तक गृह का पूर्णतः त्याग रहेगा।

  2. 2

    अपने पास पैसा, मोबाइल, अंगूठी, चैन, घड़ी आदि का त्याग रहेगा।

  3. 3

    धोती दुपट्टा, पेन, पुस्तक, डायरी, स्वाध्याय हेतु ग्रंथ के अलावा अन्य कोई भी सामग्री नहीं रखी जायेगी।

  4. 4

    बाहर से आगंतुक शिविरार्थियों को पैसा आदि कीमती सामान व अन्य सामग्री व्यवस्थापक समिति के कार्यालय में जमा करानी होगी।

  5. 5

    पुरुषों के लिए 10 दिनों तक धोती दुपट्टा में एवं महिलाओं के लिये साड़ी में रहना अनिवार्य होगा।

  6. 6

    दिन में भोजन एक समय करना होगा, अंतराय आदि आने पर, अथवा असमर्थता होने पर शाम को दूध, पानी अथवा अल्पाहार ले सकते हैं।

  7. 7

    रात्रि में 8.30 बजे से प्रातः 4.30 बजे तक मौन रखना होगा।

  8. 8

    ओढ़ने का चादर साथ लेकर आवें।

  9. 9

    शिविर के दौरान 10 दिनों तक के लिये रात्रि में समस्त प्रकार की खाद्य सामग्री एवं पेय (पानी, दूध आदि) का त्याग रहेगा।

  10. 10

    कुछ नियम समयानुसार पूज्य गुरुदेव द्वारा प्राप्त होंगे, जिनका पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।

  11. 11

    वस्त्र आदि धोने के लिये अथवा स्नान करने के लिये किसी भी प्रकार के साबुन, सर्फ आदि का उपयोग नहीं किया जायेगा।

  12. 12

    महिलायें भी शिविर में भाग ले सकती हैं, पर उनको सोने, नहाने की व्यवस्था अपने गृह पर ही करनी होगी।

  13. 13

    शिविर के दौरान दस दिनों तक पुरुष वर्ग, स्त्रियों से एवं स्त्री वर्ग पुरुषों से किसी भी प्रकार का लेन-देन या बातचीत रूप व्यवहार नहीं रखेंगे। अगर अनिवार्य हो तो गुरु आज्ञा पूर्वक ही करना होगा।

  14. 14

    शिविर के उपरोक्त नियमों का पालन करना अनिवार्य है, नियमों का उल्लंघन होने पर पूज्य गुरुदेव द्वारा प्रदत्त प्रायश्चित्त करना होगा।

  15. 15

    12 वर्ष से 75 वर्ष तक की आयु वाले व्यक्ति ही शिविर में भाग ले सकेंगे।

दैनिक चर्या

🌅 प्रातः

  • 04:00निद्रा विसर्जन, 9 बार णमोकार मंत्र का जाप
  • 04:05–04:15प्रार्थना (सुप्रभात स्तोत्र)
  • 04:15–05:00नित्य क्रियायें (शौच, स्नान आदि)
  • 05:15–06:15ध्यान (गुरुदेव द्वारा)
  • 06:15–08:15देवदर्शन, जिनाभिषेक, शान्तिधारा, पूजन
  • 08:30–08:50तत्त्वार्थ सूत्र के दस अध्यायों का वाचन
  • 08:50–09:05गुरु पूजन
  • 09:05–10:00परम पूज्य भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी गुरुदेव की दस धर्म पर अमृत देशना
  • 10:15आहार चर्या

☀️ दोपहर

  • 11:00–12:00ईर्यापथ प्रतिक्रमण (पूज्य गुरुदेव के पास)
  • 12:00–01:00माध्याह्निक देव वंदना (सामायिक)
  • 01:00–02:00मौन साधना, निजी स्वाध्याय
  • 02:00–03:00जिनागम पंथ प्रशिक्षण
  • 03:00–04:00पूज्य आचार्य श्री द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र के एक अध्याय पर प्रतिदिन प्रवचन
  • 04:15–05:15स्वल्पाहार

🪔 शाम

  • 06:30–07:00दैवसिक प्रतिक्रमण
  • 07:00–07:30आचार्य वंदना, आरती
  • 07:30–08:30सामायिक
  • 08:30–04:00रात्रि विश्राम (रात्रि में मौन रहेगा)

शिविर पंजीयन

कृपया तीनों चरण पूर्ण करें — पंजीयन क्रमांक तुरंत प्राप्त होगा

संक्षिप्त स्मरण

  • दस दिनों तक गृह, पैसा, मोबाइल आदि का पूर्ण त्याग रहेगा।
  • पुरुष धोती-दुपट्टा में एवं महिलाएँ साड़ी में रहेंगी; भोजन दिन में एक समय होगा।
  • रात्रि 8.30 से प्रातः 4.30 तक मौन; रात्रि में खाद्य एवं पेय का त्याग रहेगा।
  • आयु सीमा 12 से 75 वर्ष; समस्त नियमों का पालन अनिवार्य है।

पूर्ण नियम ऊपर नियम खण्ड में देखें।

लिंग *

12 से 75 वर्ष

पंजीयन की पुष्टि ईमेल पर भेजी जायेगी

प्रतिज्ञा

मैं ________ शिविर के समस्त नियम एवं मर्यादाओं का पूर्ण आस्था के साथ, मन, वच, काय से पालन करूँगा/करूँगी।

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